ऐतिहासिक भुल साबित हो सकत हे अंग्रेजी ल माध्यम बनाना। कही छत्तीसगढ़िया प्रतिभा ल मानसिक विकलांग करे के साजिस तो नही ?
ऐतिहासिक भुल साबित हो सकत हे अंग्रेजी ल माध्यम बनाना, छत्तीसगढ़िया प्रतिभा ल मानसिक विकलांग करे के कही साजिस तो नही ?
जबले बाल मनोबिग्यान के विकास हर सिध्द कर देहे हवय के सिक्छा के केन्द्रबिन्दु न 'बिसय' हर आंय न 'सिक्छक' बल्कि 'खुद लईकेच्च' हर आंय तबले लईका हर सीखे के सार्थक सिक्छन गतिविधि मँ सामिल ओ सकय तेखर बर बालमनोबैग्यानिक मन द्वारा लगफग 10-11 सिक्छन विधि या सुत्र तय करे गये हे जेमा कुछ बिधि प्रमुख हे जईसे 'ग्यात ले अग्यात कति' आनिक जऊंन बात ल पिलवा लईका हर आघु ले जानत हे ओला लेके आघु बढ़ना । 'मुर्त ले अमुर्त कति' आनिक आमने सामने के ठोस गियान ले कल्पना कति , 'मनोबिग्यान ले तार्किक' कति आनिक लईका के छमता अऊ रुचि अनुसार पढ़ाये जाये ओखर बादे छेवर मँ ही बिसय सामाग्री कति चेत करे जाये ।
अब आप कल्पना करव कि गैर मातृभासा अंग्रेजी या हिन्दी माध्यम मँ पढ़ईया लईका हर ए सिक्छन सुत्र ले सीखे के गतिविधी मँ भाग ले पावत हे ? कम ले कम भासाई सिक्छन दृस्टीकोन ले तो नई नई , हईच्च नई !
एखर उदाहरन हम अईसे समझ सकत हन जईसे मान लेवव एक छत्तीसगढ़िया पिलवा लईका जेखर महतारी भासा छत्तीसगढ़ी आंय ओहर अपन घर, आसपास के वातावरन मँ फईका, कथरी , छेरी , टुकनी , मया, कुकुर जईसन सैकड़ों हजारो सब्द, वाक्य सीखे के बाद इस्कूल मँ पढ़े बर गोडाई रखथे त ओला इस्कूल मँ सीखाये जाथे दरवाजा या Door, चादर या bedsheet, बकरी या Goat , टोकरी या basket, प्यार या Love, कुत्ता या Dog ।
जबले बाल मनोबिग्यान के विकास हर सिध्द कर देहे हवय के सिक्छा के केन्द्रबिन्दु न 'बिसय' हर आंय न 'सिक्छक' बल्कि 'खुद लईकेच्च' हर आंय तबले लईका हर सीखे के सार्थक सिक्छन गतिविधि मँ सामिल ओ सकय तेखर बर बालमनोबैग्यानिक मन द्वारा लगफग 10-11 सिक्छन विधि या सुत्र तय करे गये हे जेमा कुछ बिधि प्रमुख हे जईसे 'ग्यात ले अग्यात कति' आनिक जऊंन बात ल पिलवा लईका हर आघु ले जानत हे ओला लेके आघु बढ़ना । 'मुर्त ले अमुर्त कति' आनिक आमने सामने के ठोस गियान ले कल्पना कति , 'मनोबिग्यान ले तार्किक' कति आनिक लईका के छमता अऊ रुचि अनुसार पढ़ाये जाये ओखर बादे छेवर मँ ही बिसय सामाग्री कति चेत करे जाये ।
अब आप कल्पना करव कि गैर मातृभासा अंग्रेजी या हिन्दी माध्यम मँ पढ़ईया लईका हर ए सिक्छन सुत्र ले सीखे के गतिविधी मँ भाग ले पावत हे ? कम ले कम भासाई सिक्छन दृस्टीकोन ले तो नई नई , हईच्च नई !
एखर उदाहरन हम अईसे समझ सकत हन जईसे मान लेवव एक छत्तीसगढ़िया पिलवा लईका जेखर महतारी भासा छत्तीसगढ़ी आंय ओहर अपन घर, आसपास के वातावरन मँ फईका, कथरी , छेरी , टुकनी , मया, कुकुर जईसन सैकड़ों हजारो सब्द, वाक्य सीखे के बाद इस्कूल मँ पढ़े बर गोडाई रखथे त ओला इस्कूल मँ सीखाये जाथे दरवाजा या Door, चादर या bedsheet, बकरी या Goat , टोकरी या basket, प्यार या Love, कुत्ता या Dog ।
लईका कतना उत्साह के साथ इस्कूल जावत होहय फेर बपरा के आत्मविस्वास कुछ सुरवाती बछर मन मँ ही छाईराई हो जाथे जब ओला आकब होथे कि घर के भासा आने अऊ इस्कूल के भासा आने होथे , अईसनहा दसा मँ इस्कूल ओला अजीब दुनिया लगे लगथे काबर कि ओखर दुवारा सैसववस्था मँ कठिन मिहनत करके सीखे हजारों सब्द मँ प्रस्नचिन्ह लग जाथे। अऊ इही लंग ले अपन महतारी भासा के प्रति कुंठा, हीनता के बीज ओखर मन मँ रोपित हो जाथे ।
अब जबर सवाल हे कि उप्पर के बैग्यानिक सिक्छन सुत्रानुसार छत्तीसगढ़िया लईका सिक्छा पावत हे का? काबर कि जो भासा लईका घर मँ जानथे आनिक जऊंन ओला 'ग्यात' हे ओहर पाठ्यक्रम मँ हईच्च नई हे। आप एहु कल्पना करव कि ए दसा मँ लईका हर भासा सीखत रही धन 'स्थाई सीखे सीखाये के प्रक्रिया' मँ भाग लिही ?
एक आऊ जबर सवाल हे कि हमन आनिक छत्तीसगढ़िया मन सोचथन कि हिन्दी या अंगरेजी माधियम मँ अपन लईका ल नई पढ़हाबो त ओहर पिछवा जाही त एखर बर हमन खुद बिचार करिन कि का मराठी, तेलुगु, ओडिया , तमिल, मलयाली मन पछुवागे जिखर सुरवाती सिक्छा के माधियम महतारी भाखा ही रथे। ए खींख्ख सोच हमीच्च मन काबर रखथन? ए सितोन आंय कि अंगरेजी के गियान बहुत जरुरी हे , फेर एखर मतलब ए नई हे कि ओला सिध्धा माधियम बना देवय , विसय के रुप मँ भी अंगरेजी मँ टन्नक होये जा सकत हे । तमाम सिक्छा अनुसंधान तो इही कहत हे ।
आपमन जानतव कि नाहके महिना मँ आन्ध्रप्रदेस सरकार हर राज्य के अंताजी 40000 इस्कूल मँ पढ़ाई लिखाई के माधियम तेलुगु ले अंग्रेजी करे के घोसना करिच्च अऊ ओखर पाछु तरक दिहिच कि अंग्रेजी गोलोबल अऊ रोजगार के भाखा आंय अऊ अईसनहा भासा मँ तेलुगु लईका ल पारंगत (टकरहा) होना जरुरी हे । फेर ए फईसला हर भासाई मया ले लबरेज तेलुगु समाज ल आंखीफुट्टे नई सुहाईच अऊ तुरते ए फईसला ल चुनौती देहे हईदराबाद कोरट अऊ ओखर बाद उच्चतम नियालय के सरन लिहिन अऊ उच्चतम नियालय हर आन्ध्राप्रदेस सरकार ल कऊंवाके कहिच कि ए तुगलकी फरमान ल स्वीकार नई करे जा सकय काबर कि पिलवा लईका के पढे लिखे के माधियम गैर महतारी भाखा होवय बल्कि महतारी भाखा तेलुगु ही होना यथावत रहना चाहिए । काबर कि एहर ठोके पीटे बैस्विक अवधारना आंय कि लईका अपन महतारी भासा मँ ही सबले तेज गति ले सीखथे ।
फेर बिडम्बना कि ठीक इही कहानी नाहके दु बछर ले छत्तीसगढ़ राज्य मँ भी होवत हे कि वर्तमान राज्य सरकार हर धीरे धीरे सरकारी स्कूल मन ल अंगरेजी माधियम मँ बदलत हे । ए सरकार हर कथे कि हमन महात्मा गांधी , विवेकानंद के रद्दा मँ चलत हन , फेर इन्खर बुता हर ए दुनो महापुरुस के बिचार के उल्टा हवय । मांग चलत हे छत्तीसगढ़ी के हर खुलत हे स्कूल अंगरेजी..खैर उम्मीद आज भी हे..
कई ठन होये बाल विकास अनुसंधान , भारतीय संविधान , 1986 अऊ 2013 बाल सिक्छा कानुन , नवा सिक्छा नीति 2020 आनिक सब के सब कहत हे कि छोटे लईका ल गैर महतारी भासा मँ पढ़ाना मतलब ओखर सीखे के छमता ल कम कर देना आंय ओखर बाद भी ए विडम्बना ही आंय कि छग राज्य बने के 21 बछर बाद भी हमन अपन महतारी छत्तीसगढ़ी, सरगुजही, गोन्डी, हल्बी etc माध्यम मँ सिक्छा पाये बर तरसत हन अऊ गैर मातृभासा हिन्दी , अंग्रेजी माध्यम मँ सिक्छा पावत हन.. राजकुमार यादव , मस्तुरी , बेलासपुर
अब जबर सवाल हे कि उप्पर के बैग्यानिक सिक्छन सुत्रानुसार छत्तीसगढ़िया लईका सिक्छा पावत हे का? काबर कि जो भासा लईका घर मँ जानथे आनिक जऊंन ओला 'ग्यात' हे ओहर पाठ्यक्रम मँ हईच्च नई हे। आप एहु कल्पना करव कि ए दसा मँ लईका हर भासा सीखत रही धन 'स्थाई सीखे सीखाये के प्रक्रिया' मँ भाग लिही ?
एक आऊ जबर सवाल हे कि हमन आनिक छत्तीसगढ़िया मन सोचथन कि हिन्दी या अंगरेजी माधियम मँ अपन लईका ल नई पढ़हाबो त ओहर पिछवा जाही त एखर बर हमन खुद बिचार करिन कि का मराठी, तेलुगु, ओडिया , तमिल, मलयाली मन पछुवागे जिखर सुरवाती सिक्छा के माधियम महतारी भाखा ही रथे। ए खींख्ख सोच हमीच्च मन काबर रखथन? ए सितोन आंय कि अंगरेजी के गियान बहुत जरुरी हे , फेर एखर मतलब ए नई हे कि ओला सिध्धा माधियम बना देवय , विसय के रुप मँ भी अंगरेजी मँ टन्नक होये जा सकत हे । तमाम सिक्छा अनुसंधान तो इही कहत हे ।
आपमन जानतव कि नाहके महिना मँ आन्ध्रप्रदेस सरकार हर राज्य के अंताजी 40000 इस्कूल मँ पढ़ाई लिखाई के माधियम तेलुगु ले अंग्रेजी करे के घोसना करिच्च अऊ ओखर पाछु तरक दिहिच कि अंग्रेजी गोलोबल अऊ रोजगार के भाखा आंय अऊ अईसनहा भासा मँ तेलुगु लईका ल पारंगत (टकरहा) होना जरुरी हे । फेर ए फईसला हर भासाई मया ले लबरेज तेलुगु समाज ल आंखीफुट्टे नई सुहाईच अऊ तुरते ए फईसला ल चुनौती देहे हईदराबाद कोरट अऊ ओखर बाद उच्चतम नियालय के सरन लिहिन अऊ उच्चतम नियालय हर आन्ध्राप्रदेस सरकार ल कऊंवाके कहिच कि ए तुगलकी फरमान ल स्वीकार नई करे जा सकय काबर कि पिलवा लईका के पढे लिखे के माधियम गैर महतारी भाखा होवय बल्कि महतारी भाखा तेलुगु ही होना यथावत रहना चाहिए । काबर कि एहर ठोके पीटे बैस्विक अवधारना आंय कि लईका अपन महतारी भासा मँ ही सबले तेज गति ले सीखथे ।
फेर बिडम्बना कि ठीक इही कहानी नाहके दु बछर ले छत्तीसगढ़ राज्य मँ भी होवत हे कि वर्तमान राज्य सरकार हर धीरे धीरे सरकारी स्कूल मन ल अंगरेजी माधियम मँ बदलत हे । ए सरकार हर कथे कि हमन महात्मा गांधी , विवेकानंद के रद्दा मँ चलत हन , फेर इन्खर बुता हर ए दुनो महापुरुस के बिचार के उल्टा हवय । मांग चलत हे छत्तीसगढ़ी के हर खुलत हे स्कूल अंगरेजी..खैर उम्मीद आज भी हे..
कई ठन होये बाल विकास अनुसंधान , भारतीय संविधान , 1986 अऊ 2013 बाल सिक्छा कानुन , नवा सिक्छा नीति 2020 आनिक सब के सब कहत हे कि छोटे लईका ल गैर महतारी भासा मँ पढ़ाना मतलब ओखर सीखे के छमता ल कम कर देना आंय ओखर बाद भी ए विडम्बना ही आंय कि छग राज्य बने के 21 बछर बाद भी हमन अपन महतारी छत्तीसगढ़ी, सरगुजही, गोन्डी, हल्बी etc माध्यम मँ सिक्छा पाये बर तरसत हन अऊ गैर मातृभासा हिन्दी , अंग्रेजी माध्यम मँ सिक्छा पावत हन.. राजकुमार यादव , मस्तुरी , बेलासपुर
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