दाई-ददा अऊ ईस्कूल के बीच एक भिथिया खड़ा हो जाथे जब पिलवा लईका के पढ़ई लिखई के माधयम महतारी भासा ले अलगे होथे : नरेन मोदी
महतारी भासा माधयम ले कक्छा-5 तक सिक्छा देहे के गोठ लँ सिक्छा नीति 2020 मँ फोरे गये हे : परधान मंतरी
देसभर के सिक्छक , परधान पाठक मन सो बर्चुवल जुरांव मँ परधान मंतरी नरेन मोदी जी हर कहिच कि : रास्टीय सिक्छा आये के बाद एहु चरचा के बिकट हल्ला होवत हे कि पिलवा लईका लँ पढ़ाये के भासा का होहय ? त ए लंग हमन लs एक ठन जरुरी बईग्यानिक गोठ ल समझे के जरुरत हे के भासा सिक्छन के माधयम आंय , भासेच्च हर पुरा सिक्छा नोहय ! पोथी (किताबी) पढ़ाई मँ फंसे फंसे कुछ लोगन मन ए बात ल भुला जाथे तभे जऊंन भी भासा जेमा पिलवा लईका सरलता ले सीख सके , समझ सके ऊहीच्च भासा हर पढ़ाई लिखाई के भासा होना चाही । ए देखना अब्बड़ जरुरी हे के लईका लँ जब हमन पढ़ावत हन , जऊंन हमन ओखर सो गोठियावत हन , तेला का वोहर समझ पावत हे ? समझत हवय त कतका सरलता ले समझत हे ? कही अईसे तो नही कि बालमन हर बिसय लँ समझे ले जादा ऊरजा भासा ल समझे मँ खपात हे ? इही सब गोठ ल लेके बनेच्च अकन देस मँ घलो बुनियादी सिक्छा लँ महतारी भासा मँ ही देहे जाथे । आप सब मन 'पीसा' संगठन के 2018 के रपट देखे होहव त जानत होहव कि जेतका भी टाप रेकिंग के देस रहिच्च जईसे पोलेन्ड , जपान, फिनलैंन्ड, दक्छिन कोरिया , स्टोनिया ए सब देस मँ पराथमिक सिक्छा लँ महतारी भासा मँ ही देहे जाथे ।
ए गोठ हर स्वाभाविक आंय कि जेन भासा लँ सुनत सुनत पिलवा लईका बड़े होथे , जऊंन भासा हर घर के भासा होथे ऊहीच्च भासा मँ लईका के सीखे के गति बेहतर होथे । नही त ए होथे कि लईका कोई दुसर भासा मँ जब कुछु सुनथे त ओला पहिली अपन महतारी भाखा मँ मने मन अनुवाद करत रथे तहन ओला समझथे , पिलवा लईका बर एहर बहुत उलझन पैदा करथे, बपरा मन अब्बड़ तनाव मँ आ जाथे , कल्ला जाथे। एखर एक अऊ पहलु हे कि हमर देस मँ खासकर देहात मन मँ पढ़ाई लिखाई हर महतारी भाखा ले अलगे होये मँ अधिकांस दाई-ददा मन लईका के पढ़ाई लिखाई ले जुड़ नइ पावय अऊ अईसनहा मँ लईका बर पढ़ाई हर सहज पक्रिया नई रई जावय बल्कि पढ़ाई लिखाई हर ईस्कूल के 'ड्युटी' बन जाथे ! दाई-ददा अऊ ईस्कुल के बीच मँ एक खाई हो जाथे , भिथिया खड़ा हो जाथे , तभे जिहा तक हो सकय कम से कम कक्छा -5 तक महतारी भासा , छेतरीय भासा , घर के भासा लँ पढ़ाई लिखाई के माधयम रखे के गोठ लँ नवा सिक्छा नीति मँ सफा सफा फरियाये गये हे।
देसभर के सिक्छक , परधान पाठक मन सो बर्चुवल जुरांव मँ परधान मंतरी नरेन मोदी जी हर कहिच कि : रास्टीय सिक्छा आये के बाद एहु चरचा के बिकट हल्ला होवत हे कि पिलवा लईका लँ पढ़ाये के भासा का होहय ? त ए लंग हमन लs एक ठन जरुरी बईग्यानिक गोठ ल समझे के जरुरत हे के भासा सिक्छन के माधयम आंय , भासेच्च हर पुरा सिक्छा नोहय ! पोथी (किताबी) पढ़ाई मँ फंसे फंसे कुछ लोगन मन ए बात ल भुला जाथे तभे जऊंन भी भासा जेमा पिलवा लईका सरलता ले सीख सके , समझ सके ऊहीच्च भासा हर पढ़ाई लिखाई के भासा होना चाही । ए देखना अब्बड़ जरुरी हे के लईका लँ जब हमन पढ़ावत हन , जऊंन हमन ओखर सो गोठियावत हन , तेला का वोहर समझ पावत हे ? समझत हवय त कतका सरलता ले समझत हे ? कही अईसे तो नही कि बालमन हर बिसय लँ समझे ले जादा ऊरजा भासा ल समझे मँ खपात हे ? इही सब गोठ ल लेके बनेच्च अकन देस मँ घलो बुनियादी सिक्छा लँ महतारी भासा मँ ही देहे जाथे । आप सब मन 'पीसा' संगठन के 2018 के रपट देखे होहव त जानत होहव कि जेतका भी टाप रेकिंग के देस रहिच्च जईसे पोलेन्ड , जपान, फिनलैंन्ड, दक्छिन कोरिया , स्टोनिया ए सब देस मँ पराथमिक सिक्छा लँ महतारी भासा मँ ही देहे जाथे ।
ए गोठ हर स्वाभाविक आंय कि जेन भासा लँ सुनत सुनत पिलवा लईका बड़े होथे , जऊंन भासा हर घर के भासा होथे ऊहीच्च भासा मँ लईका के सीखे के गति बेहतर होथे । नही त ए होथे कि लईका कोई दुसर भासा मँ जब कुछु सुनथे त ओला पहिली अपन महतारी भाखा मँ मने मन अनुवाद करत रथे तहन ओला समझथे , पिलवा लईका बर एहर बहुत उलझन पैदा करथे, बपरा मन अब्बड़ तनाव मँ आ जाथे , कल्ला जाथे। एखर एक अऊ पहलु हे कि हमर देस मँ खासकर देहात मन मँ पढ़ाई लिखाई हर महतारी भाखा ले अलगे होये मँ अधिकांस दाई-ददा मन लईका के पढ़ाई लिखाई ले जुड़ नइ पावय अऊ अईसनहा मँ लईका बर पढ़ाई हर सहज पक्रिया नई रई जावय बल्कि पढ़ाई लिखाई हर ईस्कूल के 'ड्युटी' बन जाथे ! दाई-ददा अऊ ईस्कुल के बीच मँ एक खाई हो जाथे , भिथिया खड़ा हो जाथे , तभे जिहा तक हो सकय कम से कम कक्छा -5 तक महतारी भासा , छेतरीय भासा , घर के भासा लँ पढ़ाई लिखाई के माधयम रखे के गोठ लँ नवा सिक्छा नीति मँ सफा सफा फरियाये गये हे।
PM हर आघु कहिच्च कि : मय एहु देखे हव के कुछ लोगन मन एला लेके भरम मँ रथे कि महतारी भासा के सिवाय अऊ कोनो भी भाखा मँ पढ़ाई लिखाई बर बरजे गये हे , जबकी अईसनहा कोनो गोठ नईहे। अंगरेजी समेत कोनो भी भाखा रहय ओला जरुर पढ़य , सीखय ऐमा कोई मनाही नई हे , ए तो बढ़िता गोठ आंय फेर संगे संग सबेच्च भारतीय भाखा लँ घलो पंदोली देहे जाही ।
मय सबेच्च सिक्छक , प्रसासक , स्वंयसेवी संगठन अऊ दाई-ददा हो गोहरावत हव के आप सब मँ ए रास्टीय मिसन मँ सहजोग देवव, मोला बिस्वास हवय कि ए सहजोग ले रास्टीय सिक्छा नीति हर सफलता ले लागु होहय , धन्नबाद ।
मय सबेच्च सिक्छक , प्रसासक , स्वंयसेवी संगठन अऊ दाई-ददा हो गोहरावत हव के आप सब मँ ए रास्टीय मिसन मँ सहजोग देवव, मोला बिस्वास हवय कि ए सहजोग ले रास्टीय सिक्छा नीति हर सफलता ले लागु होहय , धन्नबाद ।
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